पंडित मधुसूदन शर्मण जी अपनी कड़ी मेहनत और प्राकृत प्रतिभा से संस्कृत भाषा में व्याकरण ,न्याय,साहित्य,वेदांत,दर्शन,ज्योतिषी,वर्षा,संगीत,ब्रह्म ,स्वर्ग,यज्ञ,आगम,आदिअनेक विषयों के जटिलताओं पर अधिकार प्राप्त किये | उन्होंने वेद के जटिल तत्वों की समीक्षा कर उसको सरल भाषा में उजागर किया |
देश-विदेश के भिन्न-भिन्न भागों में आयोजित व्याख्यानमालाओं में उपस्थित होकरअपने व्याख्यानों से उपस्थित विद्वद्जनों को चमत्कृत एवं प्रभावित किया | उन्हीं में वेद-विद्या समुद्धारक,महामहोपदेशक ,समीक्षा चक्रवर्ती ,विद्या वाचस्पति आदि है |
पंडित मधुसूदन शर्मण जी के वैदिक विज्ञान के प्रकाश को अंधकार में विलुप्त नहीं होने देने एवं उनके ज्ञान तथा स्मृति को प्रकाशमान बनाए रखने के उद्देश्य से मेरा एक छोटा सा प्रयास है "पंडित मधुसूदन शर्मा वेद विज्ञान शोध केंद्र "की स्थापना | इस शोध केंद्र की स्थापना विक्रम संवत 2073 भाद्रकृष्ण अष्टमी (25 अगस्त 2016) को पंडित जी के 150 में जन्म जयंती के दिन किया गया |
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