पंडित मधुसूदन शर्मण जी के वैदिक विज्ञान के प्रकाश को अंधकार में विलुप्त नहीं होने देने एवं उनके ज्ञान तथा स्मृति को प्रकाशमान बनाए रखने के उद्देश्य से मेरा एक छोटा सा प्रयास है "पंडित मधुसूदन शर्मा वेद विज्ञान शोध केंद्र "की स्थापना | इस शोध केंद्र की स्थापना विक्रम संवत 2073 भाद्रकृष्ण अष्टमी (25 अगस्त 2016) को पंडित जी के 150 में जन्म जयंती के दिन किया गया | यह शोध केंद्र व्यक्तिगत संस्था है | इसका किसी सरकारी या गैर सरकारी किसी संस्था अथवा किसी व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है | वंशानुक्रम ही इसके उत्तरदायी रहेंगे |
पंडित मधुसूदन शर्मण गाढ़ा ग्राम के पंडित बैद्यनाथ झा के पुत्र मधुसूदन झा थे, जो राजस्थान एवं अन्य स्थानों पर पुकारे जाने पर ओझा जी से संबोधित होते थे | वही कालांतर में ओझा जी संयुक्त होकर ओझा जी से प्रचलित हो गए | साथ ही मिथिला में झा जी को ओझा जी कहकर बुलाया जाता है और उनके श्वसुर पं चंचल झा अलवर महाराज के राज पंडित थे वे लोग पं मधुसूदन झा जी को ओझा जी से सम्बोधित करते थे जिससे वे पं मधुसूदन ओझा से प्रचलित हुए | जिस कारण उनकी रचनाएं पंडित मधुसूदन ओझा जी के नाम से प्रकाशित होने लगा, किंतु वे स्वयं अपना नाम मधसूदन शर्मण मैथिला लिखते और बताते थे | इसी कारण यह शोध केंद्र उनके इच्छित नाम पंडित मधुसूदन शर्मण के नाम से रखा गया है |
यह शोध केंद्र उन ज्ञान पिपासुओं के सहयोग के लिए स्थापित किया गया है जो वेद के विभिन्न विषयों के गूढ़ तत्वों का अध्ययन करना चाहते हैं |
यह एक निशुल्क संस्था है | अन्यत्र से आने वाले शोधकर्ताओं अथवा जिज्ञासुओं के लिए नि:शुल्क अध्ययन कक्ष,भोजन , चाय-पानी शौचालय एवं ठहरने के लिए कमरों की व्यवस्था है |
पंडित मधुसूदन शर्मण जी के प्रकाशित ग्रंथों को एकत्र करना,उसका पुनः मुद्रण एवं अप्रकाशित ग्रंथों को उपलब्ध कर उसका मुद्रण एवं प्रकाशन करना इस शोध केंद्र का एक प्रमुख उद्देश्य है |
इस शोध केंद्र का एक उद्देश्य भारतीय भाषा ,संस्कृत, साहित्य ,हिंदू धर्म दर्शन, सनातन धर्म विज्ञान, वैदिक दर्शन, धर्मशास्त्र ,वेद के विभिन्न आयामों से जुड़े विषयों पर व्याख्यानमाला तथा विचार गोष्ठियों का आयोजन एवं पंडित मधुसूदन शर्मण स्मृति संवाद का आयोजन करना भी है |
समय-समय पर विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ विद्वदजनों का सम्मान भी करना एक उद्देश्य है |
कालांतर में शोध केंद्र को विकसित करते हुए आधुनिकता का रूप भी इंटरनेट से जोड़ कर दिया जाना है |
पदमवीर शर्मा
(पंडित मधुसूदन शर्मणः (ओझा जी ) प्रपौत्र )
संस्थापक सह निदेशक
पंडित मधुसूदन शर्मणः वेद विज्ञान शोध केंद्र